“Apna sa room” Hindi Kavita

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कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे कश्म्कश में होती है, जब इंसान सोचता है की काश कहीं वो अकेले चला जाता, सबसे अलग अपनी दुनियाँ में। पर ऐसा हमेशा नहीं हो सकता, आज की generation जो कितना कुछ करना चाहती है, वो भी परिवार समाज के नाम पर कुछ करने से झिझक जाते हैं, तब उनके मन में एक बात आती है के काश मेरा कोई अलग से “Apna sa room” (अपना कमरा) होता, जहां वो बिना किसी बाधा के अपना काम कर सकता। इसी पर यह  Hindi Kavita:-

“Apna sa room”

Ghar katne ko daud raha

Aur n hi hai dil ko sukun

Thoda khud ko waqt deta

Jo hota mera apna sa room

 

Bite waqt ab yaad nahi karna

Na rehna hai khud se mehroom

Ho jate bahot se kaam

Jo hota mera apna sa room

 

Jald badal jaye ye Mausam

Nikal jaun kahi ho jaun main gum

Ja milta apni manzil se

Jo hota mera apna sa room


“अपना सा room”

घर काटने को दौड़ रहा

और न ही है दिल को सुकुन

थोड़ा खुद को वक्त देता

जो होता मेरा अपना सा room

बीते वक्त अब याद नहीं करना

ना रहना है खुद से महरूम

हो जाते बहुत से काम

जो होता मेरा अपना सा room

जल्दी बदल जाए ये मौसम

निकल जाऊँ कहीं हो जाऊँ मैं गुम

जा मिलता अपनी मंजिल से

जो होता मेरा अपना सा room

 

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