मेरी खामियाँ कविता | Please don’t love me poetry | पहले कुछ और था अब कुछ और हूँ

मेरी खामियाँ, please don't love me poetry
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यह कविता poetry उनके लिए जो किसी से प्यार करना तो चाहते हैं पर उन्हे कह भी नहीं सकते और उनका प्रोपोसल एक्सैप्ट भी नहीं केआर सकते, क्योंकि उन्हे दर है की उनका दिल फिर से न टूट जाए, तो वो अपने पुराने दौर के समय जो उनकी मजबूरी और खामियाँ थीं, उसे बताते हुये किसी से कह रहे हैं की please don’t love me, तुम मुझसे प्यार मत करो, मुझे डर है मई तुम्हारा दिल तोड़ न दूँ और कहीं मेरा दिल भी फिर से न टूट जाए।

मेरी खामियाँ  (please don’t love me poem)

पहले कुछ और था अब कुछ और हूँ

सताए मुझे, कुछ ऐसी है मेरी खामियाँ

किसी से प्यार करना भी चाहूँ

पर पास अपने आनेदेता

कोई तरक़ीब नहीं इसकी

ऐसी है मेरी खामियाँ

जानता हूँ मेरी दीदार है तुझे

अपने दिल के झरोखे से देखने की इकरार है तुझे

पर आईने से मेरे दीदार की चाहतकरना

ये आईना कहीं बिखरजाए

ऐसी है मेरी खामियाँ

आदतें पहले भी कुछ खराब थीं और कुछ अब भी खराब हैं

पर दिल सच्चा, रूह पाक और प्यार बेहिसाब है

यह भी जनता हूँ,

इन आदतों के साथ मैं मंजूर नहीं तुझको

रंज-ए-रूह की जंजीरों से जकड़ा

ऐसी है मेरी खामियाँ

तुम मेरे हो जैसे भी हो, ऐसा समझ अपना लेना

जिस्म से एक होंहों, राज़-दाँ समझ अपना लेना

पर कभी करनाये गुफ़्तनी मुझसे

कहीं मुकरजाऊँ

ऐसी है मेरी खामियाँ

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तुझे अपने पास पाता हूँ

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