Corona Virus Poetry ” Maut ki Satta”| “मौत की सत्ता” कोरोना हिन्दी कविता

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हैलो दोस्तों…!! मैंने इस corona poetry में लोगों को संदेश देने की और सरकार पर चोट करने की कोशिश की है, आशा करता हूँ मेरी यह “मौत की सत्ता” पर कविता अप सबको पसंद आएगी। मैं आप सब से विनम्र निवेदन करता हूँ की ऐसे मुश्किल और नाजुक वक़्त मे आप अपना और अपने परिवार तथा दोस्तों का मनोबल बढ़ाएँ।

Corona Virus ने अभी हमारे देश भारत की हालत बहोत खराब कर दी है, आप सभी जानते हैं कितने मासूम लोग बेवजह जान गवा रहे हैं, हर तरफ मौत का आलम है। सरकार की व्यवस्था भी लचर हो गयी है फिर भी सरकार को “मौत की सत्ता” पर अपनी सीट टिकाये रखनी है।
हमारे डॉक्टर भी लाचार हैं, Oxygen की कमी से सांसें उखड़ती नजर आ रही हैं। हमने बहोत लापरवाही कर ली और सरकार को तो आप जानते ही हैं, तो इस वक़्त आप खुद ही अपना ख्याल रख सकते हैं। कृपया lockdown और social distancing का पालन करें, मास्क जरूर लगाएँ।

पूरी कविता पढ़ने के लिए कृपया नीचे scroll करें।

“मौत की सत्ता”

न बची कोई मानवता है
फिर भी हैं चुप क्या कैसे कहें
हर तरफ हैं लाशें और हम मुर्दा
कब तक ऐसी मौत सहें।

खो गयी किसी की माँ-ममता
तो किसी ने बच्चे खोए हैं
हर तरफ कभी खुशहाली थी
अब मातम में हर घर रोए हैं।

लालच बड़ी और जान है छोटी
अब काम है ऐसे होने लगे
दाम बड़ा दी मौत की लेकिन
अपने तो खुद को खोने लगे।

क्या मिलेगी ऐसी सत्ता से
जब लाचार-लचर है देश तुम्हारा
कभी सोची होती हम सबकी
कुछ बेहतर होता देश हमारा।

कुछ लापरवाही हम सबकी है
न गंभीर कभी हम होते हैं
चीख चीख कर मौत डराए
हम फिर भी चैन से सोते हैं।

शौक से तुमने कुम्भ कराया
और हवन तुम्हे करवाने थे
अब कहो सबकी जान बचाने
क्या राम जी आने वाले थे?

थमते न ये आँसू हैं
बेवक़्त क्यों जान ये जानी थी
कुछ कर न सके बड़े बेबस हैं
जिन्हें जान हमारी बचानी थी।

कुछ अपनी परछाई से भी डरो
कहीं साथ न तुमसे वो छोड़े
डरो के अब तक चुप हैं सब
कहीं गुबार ये जनता न फोड़े।

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